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वीर शहीदां री खबरां

उडती-उडती जाए रे कुंरजियां, परदेशा मे जाईये रे…..। छैल भँवर जी फौजा बसे, म्हारो जी घबरावे रे…. ।। लाईजो खबरां ने, अरररर लाईजो खबरां ने…… । भारत रा वीर किण विद लडियां रे , लाईजो खबरां ने…।। सरहद माथे दुश्मन वारा डेरा कतरा मंडियां रे…..। छैल भँवर जी किं करता रे म्हाने सुणाईद्यो रे….।। लाईजो …

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pulvama

उन शहीदों की शहादत को, मुश्किल है अब भूल पाना । उठो साथी कूच करो, पुकार रहा है पुलवामा ।। कितनी माँ ने लाल खो दिये,कितने सुहाग, सुहागिन ने । कितने बच्चे पिता खो गये,कितने भाई, बहिन ने ।। बिलखती उन आँखो के आँसू,की कीमत है चुकवाना । उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा …

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नई पार्टी नए दल के I नए नेता नए कल के II

नया चेहरा नई चाहत I नए अर्मा नई राहत II नई ख्वाहिस नई मंजिल I नया माझी नई साहिल II अलग-सा है आज राहों में धुप का सुनेह्रापन I आएगा ओर भी अब मेरी चाहत में गहरापन II नई सासे नई खुश्बू I नए गेशु नया जादू II नई सुबह नई राते I नई यारी …

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झूठी-मुटी, झूठी-मुटी, झूठी-मुटी

झूठी-मुटी, झूठी-मुटी, झूठी-मुटी,……… दिया बुझाए जिया जलाए धुल उडाए साझ को झूठी-मुटी, झूठी-मुटी, झूठी-मुटी,……… बाते बनाए मुझको रिझाए शम्मा दिखाए चाँद को झूठी-मुटी, झूठी-मुटी, झूठी-मुटी,……… धुरी पे चुन्नी कि झुला डाले उन्घी लगाए झूले मे बाली बजाए सूरत सजाए आइना बनाए काच को झूठी-मुटी, झूठी-मुटी, झूठी-मुटी,……… प्रीत के गीत से मन मोहे खेत घुमाए रात …

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मै जला, मै जला

मै जला, मै जला , देर शब मै जला I बुझ गए जलने वाले सब-के-सब मै जला II तूने देखा तेरे दर दिएँ जल बुझ गए I क्या देखा नहीं तूने रब मै जला II राख़ अपने बारे में मुझसे पूछ रहा था I मोहब्बत हुई मुझको कब, कब मै जला II चाँद को जब …

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एक हम है एक आप हो

मोहब्बत के पागल में, एक हम है एक आप हो I दो दिलों के हलचल में, एक हम है एक आप हो II ज़मीन-ए-मोहब्बत में कई इश्क के गुल खिले है I पर सबसे उम्दा फसल में, एक हम है एक आप हो II यादों के दरख़्त में मुस्कान पत्ते, गुल हँसी के I ओर …

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Kbtak

तू रुकेगा कबतक तू झुकेगा कबतक तू थमेगा कबतक तू सहेगा कबतक खुद को तू जान ले न कोई तेरा मान ले जीना तुझे है अगर तो रोज़ मरना जान ले कबतक हां कबतक ,कबतक हाँ……

Aurat Ka Dhokha

Created by :- Mohammad Irfan ज़ालिम ये क्या किया हमें बर्बाद कर दिया | अरमानो के महल को ताराज कर दिया || तेरा न बिगड़ा कुछ भी, वाहों में उसकी जाकर रोते हें हम हमारे , उजड़े हुए जहां पर तूने जिगर को छेद के पार कर दिया | अरमानों के महल को तराज़ कर …

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